हिंदसा

सोमवार, 14 सितंबर 2020


 

हिंदी भाषा (कविता)

हिंदी मेरे हिंद की भाषा
तू ही तो मेरी पहचान है|
तू ही मेरी मातृ भाषा
तू ही मेरा रोजगार है।
तू नहीं आई ओर कहीं से
तू भारत माँ की सौगात है।
देवभाषा है तेरी जननी
तू राष्ट्र का अभिमान है।
सरलता है आभूषण तेरा
तू विपुल वर्णों का मेल है।
पहन मात्राओं का बाना
बिंदी से करती श्रृंगार है।
जो भी आई विदेशी भाषा
तूने सबका किया सत्कार है।
तेरा नहीं किसी से झगड़ा
तू भारत देश की शान है।
बस्ती तुझमें भारत-आत्मा
सभी को तुझसे प्यार है।
हिंदी मेरे हिंद की भाषा
तू ही तो मेरी पहचान है।

@डॉ. अनिता देवी

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