हिंदी कहानी का विकास
कहानी साहित्य की रोचक और सशक्त विधा है कहानी का प्रचलन मानव के विकास के साथ ही हुआ है प्रारंभ में कहानियों को कहने सुनने की प्रथा प्रचलित थी परंतु आज की कहानी प्राचीन भारतीय परंपरा से होती हुई पाश्चात्य कहानी के आधार पर विकसित हुई है। हिंदी में आधुनिक कहानी का जन्म 19वीं शताब्दी के प्रारंभ से माना जाता है 19वीं शताब्दी के आरंभ में ईशा अल्लाह खान ने रानी केतकी की कहानी लिखी थी। कुछ लोग इसे ही हिंदी की पहली कहानी मानते हैं। इनके पश्चात शिवप्रसाद सितारे हिंद ने राजा भोज का सपना नामक कहानी लिखी और भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अद्भुत अपूर्व स्वप्न लिखी लेकिन यह सारी कहानियां आधुनिक हिंदी कहानी की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। 1900 से 1910 के बीच में किशोरी लाल गोस्वामी ने इंदुमती, रामचंद्र शुक्ल ने ग्यारह वर्ष का समय बंग महिला ने दुलाईवाली नामक कहानी लिखी। वृंदावनलाल वर्मा ने राखी बंद भाई, मैथिलीशरण गुप्त कौन की नकली किला नामक कहानियां प्रकाशित हुई।
प्रसाद व प्रेमचंद जी को आधुनिक कहानी का सूत्रधार होने का गौरव प्राप्त हुआ। प्रसाद जी की ग्राम नामक कहानी 1911 में तथा प्रेमचंद जी की कहानी पंच परमेश्वर 1916 में प्रकाशित हुई। यहीं से आधुनिक कहानी का विकास माना गया। कहानी के विकास को अच्छी प्रकार से जानने के लिए पुरे विकास को प्रसाद युग, प्रेमचंद युग तथा जैनेंद्र युग आदि के रूप में विभाजित कर सकते हैं।
जयशंकर प्रसाद मूलतः कवि थे लेकिन उन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी में भी अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया है। प्रसाद जी ने भावना मूलक कहानियां लिखी है, इन्होंने धार्मिक सामाजिक ऐतिहासिक तथा राजनैतिक कहानियां लिखी। इनकी कहानियों में काव्य का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। इनकी भाषा संस्कृतनिष्ट है। चरित्र-चित्रण में प्रसाद जी की कोई बराबरी नहीं कर सकता। वातावरण के चित्रण में प्रसाद जी सिद्धहस्त हैं। छाया, आंधी, प्रतिध्वनि, इंद्रजाल, आकाशदीप उनके कहानी संग्रह हैं। उनकी गुंडा कहानी बहुत प्रसिद्ध है प्रसाद युग के अन्य लेखकों में राधा कृष्ण दास, चंडी प्रसाद हरदेश, विनोद शंकर व्यास आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।
मुंशी प्रेमचंद हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार हैं। उन्होंने लगभग 300 कहानियां लिखी हैं। इनमें सामाजिक राजनैतिक ऐतिहासिक सभी प्रकार की कहानियां है। बड़े घर की बेटी, पूस की रात, रानी शारदा, शतरंज के खिलाड़ी, बूढ़ी काकी, बेटों वाली विधवा, गुल्ली डंडा आदि प्रसिद्ध कहानियां हैं। इनकी कहानियां मानसरोवर खंड में भी प्रकाशित हैं । इनकी कहानियों में पीड़ित, दलित जनता का मार्मिक चित्रण है। उनके प्रति सहानुभूति का भाव पाठकों के हृदय में उत्पन्न होता है। इसी प्रकार ये भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले कहानीकार हैं। इनकी कहानियों की भाषा सरल, सहज, बोलचाल की भाषा है। पात्रों के अनुकूल है। और मुहावरों का सटीक प्रयोग हमें प्रेमचंद की कहानियों में मिलता है। इस समय के कहानीकारों में पंडित गुलेरी जी का नाम आता है | इनकी मार्मिक और स्वाभाविक शैली के कारण 'उसने कहा था' नामक कहानी विश्व की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है। यह एक प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी में युद्ध के सजीव वातावरण के भीतर सरल और निश्छल प्रेम की अभिव्यक्ति हुई है। विशंभर नाथ शर्मा कोशिश इसी तरह के दूसरे कहानीकार हैं। जिन्होंने अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को उठाया है। ताई उनकी सर्वश्रेष्ठ कहानी है। सुदर्शन प्रेमचंद के समय के विशिष्ट कहानीकार हैं। जिनकी कहानी में जीवन का सच्चा चित्र व हृदय स्पर्शी वर्णन मिलता है। उनकी कहानियों के लगभग 10 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। पांडे बेचन शर्मा उग्र यथार्थवादी कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक रूढ़ियों व परंपराओं के प्रति विद्रोह का स्वर उभर कर आया है। आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने भी अपनी कहानियों में सामाजिक कुरीतियों को विषय बनाया है। उन्होंने ऐतिहासिक कहानियां भी लिखी है। दुखवा मैं कासे कहूं मोरी सजनी इनका कहानी संग्रह है।
कहानीकार जैनेंद्र हिंदी में मनोवैज्ञानिक आधार को लेकर कहानियां लिखते रहे। उनके ऊपर फ्राइड का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। शिल्प और भाव की दृष्टि से इनकी कहानियां उच्च कोटि की है। पारिवारिक जीवन का चित्रण और समस्याओं का उद्घाटन करना इनकी कहानियों की विषय वस्तु है। इन्होंने अपनी कहानियों के पात्रों का चरित्र चित्रण मनोविज्ञान के आधार पर किया है | इनकी कहानियों में पाज़ेब और पत्नी प्रसिद्ध कहानियां है। इलाचंद्र जोशी भी मनोवैज्ञानिक कहानीकार हैं। फ्रॉयड से प्रभावित इनकी कहानियों में भी मानव चित्रण का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। जोशी जी की कहानियां निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत संकलित हैं- आहुति, दिवाली व होली, रोमांटिक छाया आदि |
अज्ञेय भी श्रेष्ठ, प्रतिभा संपन्न कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में उनके हृदय की विरोधी भावना स्पष्ट दिखाई देती है। परंपरा, कोठरी की बात इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह है ।रोज इन की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। भगवतीचरण वर्मा की कहानियों में वर्तमान युग की संघर्ष भावना, हलचल और अशांति की झलक विद्यमान है। आज के शहरी जीवन के खोखलेपन और पतन की ओर बढ़ते मध्यवर्गीय समाज का चित्रण की कहानियों में मिलता है। खिलते फूल, दो बांके इंस्टॉलमेंट नामक इनके कहानी संग्रह हैं।
जिस प्रकार प्रेमचंद और अज्ञेय ने हिंदी कहानी की दिशा को मोड़ दिया था। उसी प्रकार यशपाल भी हिंदी कहानी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार हैं। उन्होंने समकालीन हिंदी कहानीकारों को बहुत प्रभावित किया। इनकी कहानियों पर मार्क्सवाद का प्रभाव है। उनकी यथार्थवादी कहानियों की कथावस्तु व भाषा शैली गंभीर है। फूलों का कुर्ता, वह दुनिया, पिंजरे की उड़ान आदि इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह हैं।उपेंद्र नाथ अश्क ने भी अपनी सामाजिक कहानियों के द्वारा समाज की रूढ़ियों और अंधविश्वासों पर चोट की है। पिंजरा काजी साहब, बैंगन का पौधा इनके प्रसिद्ध हैं। कहानी विधा को वृंदावनलाल वृंदावनलाल वर्मा, राहुल सांकृत्यायन, अमृतलाल नागर, चंद्रगुप्त विद्यालंकार ने अपनी अमूल्य कहानियां देकर समृद्ध किया है। फणीश्वर नाथ रेणु की ठेठ, पुरानी कहानी नया पाठ आदि प्रसिद्ध कहानियों में शामिल हैं | स्वतंत्रता के बाद बहुत से लेखक कहानी क्षेत्र में आए जिनमें प्रमुख कहानीकारों का नाम इस प्रकार हैं- मोहन राकेश, भारती, हरिशंकर देसाई , लक्ष्मीनारायण लाल, राजेंद्र यादव, मन्नू भंडारी, फणीश्वर नाथ रेणु, निर्मल वर्मा, विष्णु प्रभाकर, भीष्म साहनी, दीप्ति खंडेलवाल, शिवानी, अमरकांत, मैत्रेयी पुष्पा, कमलेश्वर आदि के नाम प्रमुख हैं। इन्होंने कहानी के क्षेत्र में नए नए प्रयोग किए हैं। पत्र-पत्रिकाओं का भी हिंदी कहानी के विकास में बहुत योगदान है। बहुत सी वार्षिक, मासिक, साप्ताहिक ऐसी पत्रिकाएं हैं जिनमें सिर्फ कहानियां प्रकाशित होती है। आज के व्यस्त जीवन में कहानी मनुष्य के तन मन को शांति व प्रसन्नता प्रदान करने वाला एक ऐसा साधन है जिसे पढ़कर मनुष्य सुख का अनुभव करता है। आज के पाठकों का लगाओ कहानी लेखकों को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। हंस, सरिता, सारिका, तद्भव, कथादेश ऐसी पत्रिकाएं हैं जो हिंदी कहानी के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
कहानी साहित्य की रोचक और सशक्त विधा है कहानी का प्रचलन मानव के विकास के साथ ही हुआ है प्रारंभ में कहानियों को कहने सुनने की प्रथा प्रचलित थी परंतु आज की कहानी प्राचीन भारतीय परंपरा से होती हुई पाश्चात्य कहानी के आधार पर विकसित हुई है। हिंदी में आधुनिक कहानी का जन्म 19वीं शताब्दी के प्रारंभ से माना जाता है 19वीं शताब्दी के आरंभ में ईशा अल्लाह खान ने रानी केतकी की कहानी लिखी थी। कुछ लोग इसे ही हिंदी की पहली कहानी मानते हैं। इनके पश्चात शिवप्रसाद सितारे हिंद ने राजा भोज का सपना नामक कहानी लिखी और भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अद्भुत अपूर्व स्वप्न लिखी लेकिन यह सारी कहानियां आधुनिक हिंदी कहानी की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। 1900 से 1910 के बीच में किशोरी लाल गोस्वामी ने इंदुमती, रामचंद्र शुक्ल ने ग्यारह वर्ष का समय बंग महिला ने दुलाईवाली नामक कहानी लिखी। वृंदावनलाल वर्मा ने राखी बंद भाई, मैथिलीशरण गुप्त कौन की नकली किला नामक कहानियां प्रकाशित हुई।
प्रसाद व प्रेमचंद जी को आधुनिक कहानी का सूत्रधार होने का गौरव प्राप्त हुआ। प्रसाद जी की ग्राम नामक कहानी 1911 में तथा प्रेमचंद जी की कहानी पंच परमेश्वर 1916 में प्रकाशित हुई। यहीं से आधुनिक कहानी का विकास माना गया। कहानी के विकास को अच्छी प्रकार से जानने के लिए पुरे विकास को प्रसाद युग, प्रेमचंद युग तथा जैनेंद्र युग आदि के रूप में विभाजित कर सकते हैं।
जयशंकर प्रसाद मूलतः कवि थे लेकिन उन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी में भी अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित किया है। प्रसाद जी ने भावना मूलक कहानियां लिखी है, इन्होंने धार्मिक सामाजिक ऐतिहासिक तथा राजनैतिक कहानियां लिखी। इनकी कहानियों में काव्य का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। इनकी भाषा संस्कृतनिष्ट है। चरित्र-चित्रण में प्रसाद जी की कोई बराबरी नहीं कर सकता। वातावरण के चित्रण में प्रसाद जी सिद्धहस्त हैं। छाया, आंधी, प्रतिध्वनि, इंद्रजाल, आकाशदीप उनके कहानी संग्रह हैं। उनकी गुंडा कहानी बहुत प्रसिद्ध है प्रसाद युग के अन्य लेखकों में राधा कृष्ण दास, चंडी प्रसाद हरदेश, विनोद शंकर व्यास आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।
मुंशी प्रेमचंद हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार हैं। उन्होंने लगभग 300 कहानियां लिखी हैं। इनमें सामाजिक राजनैतिक ऐतिहासिक सभी प्रकार की कहानियां है। बड़े घर की बेटी, पूस की रात, रानी शारदा, शतरंज के खिलाड़ी, बूढ़ी काकी, बेटों वाली विधवा, गुल्ली डंडा आदि प्रसिद्ध कहानियां हैं। इनकी कहानियां मानसरोवर खंड में भी प्रकाशित हैं । इनकी कहानियों में पीड़ित, दलित जनता का मार्मिक चित्रण है। उनके प्रति सहानुभूति का भाव पाठकों के हृदय में उत्पन्न होता है। इसी प्रकार ये भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले कहानीकार हैं। इनकी कहानियों की भाषा सरल, सहज, बोलचाल की भाषा है। पात्रों के अनुकूल है। और मुहावरों का सटीक प्रयोग हमें प्रेमचंद की कहानियों में मिलता है। इस समय के कहानीकारों में पंडित गुलेरी जी का नाम आता है | इनकी मार्मिक और स्वाभाविक शैली के कारण 'उसने कहा था' नामक कहानी विश्व की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है। यह एक प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी में युद्ध के सजीव वातावरण के भीतर सरल और निश्छल प्रेम की अभिव्यक्ति हुई है। विशंभर नाथ शर्मा कोशिश इसी तरह के दूसरे कहानीकार हैं। जिन्होंने अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को उठाया है। ताई उनकी सर्वश्रेष्ठ कहानी है। सुदर्शन प्रेमचंद के समय के विशिष्ट कहानीकार हैं। जिनकी कहानी में जीवन का सच्चा चित्र व हृदय स्पर्शी वर्णन मिलता है। उनकी कहानियों के लगभग 10 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। पांडे बेचन शर्मा उग्र यथार्थवादी कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक रूढ़ियों व परंपराओं के प्रति विद्रोह का स्वर उभर कर आया है। आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने भी अपनी कहानियों में सामाजिक कुरीतियों को विषय बनाया है। उन्होंने ऐतिहासिक कहानियां भी लिखी है। दुखवा मैं कासे कहूं मोरी सजनी इनका कहानी संग्रह है।
कहानीकार जैनेंद्र हिंदी में मनोवैज्ञानिक आधार को लेकर कहानियां लिखते रहे। उनके ऊपर फ्राइड का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। शिल्प और भाव की दृष्टि से इनकी कहानियां उच्च कोटि की है। पारिवारिक जीवन का चित्रण और समस्याओं का उद्घाटन करना इनकी कहानियों की विषय वस्तु है। इन्होंने अपनी कहानियों के पात्रों का चरित्र चित्रण मनोविज्ञान के आधार पर किया है | इनकी कहानियों में पाज़ेब और पत्नी प्रसिद्ध कहानियां है। इलाचंद्र जोशी भी मनोवैज्ञानिक कहानीकार हैं। फ्रॉयड से प्रभावित इनकी कहानियों में भी मानव चित्रण का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। जोशी जी की कहानियां निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत संकलित हैं- आहुति, दिवाली व होली, रोमांटिक छाया आदि |
अज्ञेय भी श्रेष्ठ, प्रतिभा संपन्न कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में उनके हृदय की विरोधी भावना स्पष्ट दिखाई देती है। परंपरा, कोठरी की बात इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह है ।रोज इन की सर्वश्रेष्ठ कहानी है। भगवतीचरण वर्मा की कहानियों में वर्तमान युग की संघर्ष भावना, हलचल और अशांति की झलक विद्यमान है। आज के शहरी जीवन के खोखलेपन और पतन की ओर बढ़ते मध्यवर्गीय समाज का चित्रण की कहानियों में मिलता है। खिलते फूल, दो बांके इंस्टॉलमेंट नामक इनके कहानी संग्रह हैं।
जिस प्रकार प्रेमचंद और अज्ञेय ने हिंदी कहानी की दिशा को मोड़ दिया था। उसी प्रकार यशपाल भी हिंदी कहानी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार हैं। उन्होंने समकालीन हिंदी कहानीकारों को बहुत प्रभावित किया। इनकी कहानियों पर मार्क्सवाद का प्रभाव है। उनकी यथार्थवादी कहानियों की कथावस्तु व भाषा शैली गंभीर है। फूलों का कुर्ता, वह दुनिया, पिंजरे की उड़ान आदि इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह हैं।उपेंद्र नाथ अश्क ने भी अपनी सामाजिक कहानियों के द्वारा समाज की रूढ़ियों और अंधविश्वासों पर चोट की है। पिंजरा काजी साहब, बैंगन का पौधा इनके प्रसिद्ध हैं। कहानी विधा को वृंदावनलाल वृंदावनलाल वर्मा, राहुल सांकृत्यायन, अमृतलाल नागर, चंद्रगुप्त विद्यालंकार ने अपनी अमूल्य कहानियां देकर समृद्ध किया है। फणीश्वर नाथ रेणु की ठेठ, पुरानी कहानी नया पाठ आदि प्रसिद्ध कहानियों में शामिल हैं | स्वतंत्रता के बाद बहुत से लेखक कहानी क्षेत्र में आए जिनमें प्रमुख कहानीकारों का नाम इस प्रकार हैं- मोहन राकेश, भारती, हरिशंकर देसाई , लक्ष्मीनारायण लाल, राजेंद्र यादव, मन्नू भंडारी, फणीश्वर नाथ रेणु, निर्मल वर्मा, विष्णु प्रभाकर, भीष्म साहनी, दीप्ति खंडेलवाल, शिवानी, अमरकांत, मैत्रेयी पुष्पा, कमलेश्वर आदि के नाम प्रमुख हैं। इन्होंने कहानी के क्षेत्र में नए नए प्रयोग किए हैं। पत्र-पत्रिकाओं का भी हिंदी कहानी के विकास में बहुत योगदान है। बहुत सी वार्षिक, मासिक, साप्ताहिक ऐसी पत्रिकाएं हैं जिनमें सिर्फ कहानियां प्रकाशित होती है। आज के व्यस्त जीवन में कहानी मनुष्य के तन मन को शांति व प्रसन्नता प्रदान करने वाला एक ऐसा साधन है जिसे पढ़कर मनुष्य सुख का अनुभव करता है। आज के पाठकों का लगाओ कहानी लेखकों को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। हंस, सरिता, सारिका, तद्भव, कथादेश ऐसी पत्रिकाएं हैं जो हिंदी कहानी के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
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