हिंदसा

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

अखबारी हिंदी

अखबारी हिंदी


अखबारी हिंदी कोई और भाषा नहीं, बल्कि हिंदी भाषा में छपने वाले अखबारों की भाषा होती है। फर्क इतना है कि अखबार के लिए हम साहित्यिक हिंदी का प्रयोग न करके हिंदी के सरल रूप का प्रयोग करते हैं । अर्थात जिस हिंदी का प्रयोग हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं और जिसे हम हिंदी का प्रचलित रूप भी कहते हैं, संपादक उसी हिंदी को अखबार की भाषा बनाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अखबार का पाठक शिक्षित , अर्धशिक्षित, बालक, युवा और वृद्ध भी हो सकता है| संपादक अपने अखबार के लिए भाषा का चुनाव पाठक को दृष्टि में रखकर करता है। अखबार का पाठक दूरदराज के गांव देहात में रहने वाला कम पढ़ा-लिखा भी हो सकता है और शहर में रहने वाला अधिक पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी हो सकता है अतः संपादक अपने हर वर्ग के पाठक को ध्यान में रखता है। लेकिन अखबार की भाषा का जितना सरल और सहज होना आवश्यक है उतना ही भाषा का आकर्षक, संप्रेषणीय और प्रवाहमयी होना भी जरुरी है|
अखबार में जितने प्रकार की खबरें छपती हैं भाषा भी उतने ही प्रकार ही हो जाती है| एक ही अखबार में भाषा के अनेक रूप देखने को मिलते हैं जैसे - सम्पादकीय लेखों की भाषा, वाणिज्य समाचारों की भाषा, खेलकूद के समाचारों की भाषा आदि |
अखबार का संवाददाता हर रोज घटित होने वाली देश-विदेश की हर प्रकार की छोटी-बड़ी घटनाओं को अपने अखबार के माध्यम से सामान्य लोगों तक पहुंचाता है। अत: वह सभी समाचारों के लिए एक विशेष प्रकार की भाषा का प्रयोग करता है | अखबारी हिंदी की सामान्य विशेषताएं इस प्रकार हैं--
  • अखबारी हिंदी में संयुक्त वर्णों के स्थान पर सरल शब्दों या अक्षरों का प्रयोग होना चाहिए।
  • अखबार में लंबे और जटिल वाक्यों का प्रयोग न करके छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए
  • बड़े-बड़े अनुच्छेदों के स्थान पर छोटे-छोटे अनुच्छेदों में लिखा जाए तो ज्यादा अच्छा रहता है।
  • छोटे छोटे अनुच्छेद और वे भी सरल भाषा में लिखे गए हो तो पाठक अखबार को बड़ी तल्लीनता से पढ़ता है और उसमें उदासीनता नहीं आती ।
  • लाक्षणिक भाषा का प्रयोग अखबार में नहीं करना चाहिए ऐसा करने से समाचार का उद्देश्य या सम्प्रेषणीयता खत्म हो जाती है।
  • समाचार लिखते समय यदि प्रातः घटित होने वाली घटना का उल्लेख करना हो तो पौ फटना जैसे शब्दों के स्थान पर आज सवेरे या प्रातः काल जैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। अखबारी हिंदी में अर्थ की स्पष्टता होनी चाहिए ।
  • अनेकार्थी ( जिनके अनेक अर्थ निकलते हो ) ऐसे शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए नहीं तो पाठक अर्थ का अनर्थ कर सकता है कहने का अर्थ यह है कि वह अर्थ नहीं लेगा जो संवाददाता देना चाहता है।
  • संकेत अक्षरों के स्थान पर पूर्ण नाम लिखे जाने चाहिए।
  • लेकिन जो संकेत अक्षर रूढ़ हो गए हैं उनका प्रयोग किया जा सकता है जैसे भारतीय जनता पार्टी के लिए भाजपा समाजवादी पार्टी के लिए सपा आदि
  • अखबारी हिंदी में संख्याएं अंकों में न लिखकर शब्दों में लिखी जानी चाहिए
  • अखबारी हिंदी में प्रायः अन्य पुरुष का प्रयोग होता है जैसे उसने कहा था आदि
  • अखबारी हिंदी में दोहरी तेहरी क्रियाओं जैसे- बंद कर दिया गया, खरीद लिया गया के स्थान पर एकहरी क्रिया का ही प्रयोग करना चाहिए जैसे बंद किया, खरीद लिया आदि
  • स्थान का अभाव अखबार में रहता है इसलिए संक्षिप्त शब्दों का प्रयोग अधिक किया जाना चाहिए।
  • पहले वाक्य में पूरे शब्द लिखकर बाद में संक्षिप्त शब्दों का लिखा जाना सही रहता है । जैसे शुरू में लिखना है तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उसके बाद केवल प्रधानमंत्री जी शब्द का प्रयोग किया जा सकता है ।
  • अखबारी हिंदी में पारिभाषिक शब्दावली का भी अभाव रहता है परंतु आर्थिक जगत, वाणिज्य, खेलकूद आदि के संबंध में पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग अनुचित नहीं माना जाता।
  • पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग अगर किया जाए तो सावधानीपूर्वक ही करना चाहिए
  • साथ-साथ वर्तनी तथा विराम आदि की दृष्टि से भी अखबारी हिंदी में एकरूपता होनी चाहिए । यदि किसी समाचार पत्र में विराम (।) के स्थान पर फुलस्टॉप(.) लगाए जाने की नीति को अपनाया गया है तो शुरू से लेकर आखिर तक एक ही नीति का प्रयोग होना चाहिए ।
  • समाचारों में शीर्षक का बहुत अधिक महत्व होता है। अतः समाचारों के शीर्षक भी सीधे-सरल, आकर्षक और उपयुक्त होने चाहिए ।
अभ्यास के लिए-
  • अखबारी हिंदी को समझने के लिए हर रोज अखबार पढ़िए और अखबार की संपादकीय हिंदी, वाणिज्य हिंदी और खेलकूद की हिंदी में पाए जाने वाले अंतर को समझिए।
  • अखबारी हिंदी के अलग अलग रूपो का उदाहरण दीजिए।

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